बड़े शहरों में तेजी से बढ़ रहा सीनियर लिविंग का मार्केट, DLF समेत बड़े डेवलपरों की दिलचस्पी बढ़ी
भारत के बड़े शहरों में सीनियर लिविंग तेजी से लक्जरी आवासीय क्षेत्र के रूप में उभर रहा है। कई बड़े डेवलपर इस क्षेत्र में प्रवेश करने की तैयारी कर रहे हैं। इसके पीछे बढ़ती आय और परिवारों की बदलती संरचना मुख्य कारण हैं। पहले सीनियर लिविंग का संबंध बड़े शहरों से दूर बने रिटायरमेंट कम्युनिटी से था।
अब दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर), पुणे और मुंबई जैसे बड़े शहरों में इसका विस्तार हो रहा है। एनसीआर में गुरुग्राम और नोएडा इसके प्रमुख केंद्र बन रहे हैं। इस बदलाव के पीछे कई कारण हैं। संपन्न बुजुर्गों की आय बढ़ रही है। उनकी जीवन प्रत्याशा भी बढ़ रही है। वे बड़े शहरों में उपलब्ध बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के पास रहना चाहते हैं। साथ ही वे शहरी जीवन के सामाजिक संबंधों को भी बनाए रखना चाहते हैं।
डीएलएफ होम्स के प्रबंध निदेशक और मुख्य कारोबार अधिकारी आकाश ओहरी ने कहा, '60 साल का होना अब जीवन से रिटायर होने के रूप में नहीं देखा जाता। ऐसे लोग पहले से ज्यादा स्वस्थ और सक्रिय हैं। उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर है। वे पेशेवर, सामाजिक और निजी जीवन में सक्रिय रहना चाहते हैं।'
बाजार पूंजीकरण के आधार पर भारत की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ गुरुग्राम के सेक्टर 63 में अपना लग्जरी सीनियर लिविंग प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी में है। इसकी अनुमानित बिक्री क्षमता करीब 2,000 करोड़ रुपये है।
गुरुग्राम की एक अन्य सूचीबद्ध डेवलपर कंपनी एक सीनियर लिविंग ऑपरेटर के साथ साझेदारी पर बातचीत कर रही है। कंपनी अपनी मौजूदा लग्जरी परियोजनाओं में कुछ इकाइयों को बुजुर्गों के लिए बाजार में उतारने की योजना बना रही है। मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने यह जानकारी दी।
कंपनी के एक अधिकारी ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा, 'इस क्षेत्र में विकास की काफी संभावना है। मांग आपूर्ति से बहुत ज्यादा है।' उन्होंने कहा कि कंपनी की योजना अभी सार्वजनिक नहीं हुई है।
मनसुम सीनियर लिविंग के सह-संस्थापक अनंतराम वी वरयूर ने कहा, 'हम उम्मीद करते हैं कि अधिक डेवलपर इस अवसर का आकलन करेंगे। खासकर उन बाजारों में जहां संपन्न बुजुर्गों की संख्या ज्यादा है और स्वास्थ्य सेवाओं की अच्छी व्यवस्था है।'
पारंपरिक रिटायरमेंट होम से अलग नई परियोजनाएं शहरों में स्थान, बड़े घर, स्वास्थ्य सेवाएं, वेलनेस, हॉस्पिटैलिटी और सामुदायिक सुविधाएं देने पर जोर दे रही हैं।
जेएलएल और एसोसिएशन ऑफ सीनियर लिविंग इंडिया (एएसएलआई) की इस महीने आई रिपोर्ट के अनुसार, जून तक संगठित सीनियर लिविंग की कुल आपूर्ति 25,050 इकाइयों की थी। 2024 से जून तक इसमें सालाना 14.2 फीसदी की दर से वृद्धि हुई। 2019 से 2023 के बीच यह वृद्धि दर 8.5 फीसदी थी। इस बाजार में शहरी और आर्थिक रूप से स्वतंत्र बुजुर्ग परिवार शामिल हैं।
इनकी संख्या इस साल 17 लाख से बढ़कर 2030 तक 21 लाख होने का अनुमान है। मूडीज रेटिंग्स के वैश्विक जनसांख्यिकी संबंधी आंकड़ों के अनुसार, भारत 2065 तक अति वृद्ध समाज बन सकता है। इसमें देश की 21 फीसदी आबादी 65 साल या उससे अधिक उम्र की होगी। इससे सीनियर लिविंग की जरूरत और बढ़ सकती है।
60 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों की संख्या इस साल 16.69 करोड़ से बढ़कर 2030 तक 19.15 करोड़ होने का अनुमान है। 2050 तक यह संख्या दोगुनी होकर 34.6 करोड़ हो सकती है। बेहतर गुणवत्ता वाली आपूर्ति मांग से पीछे रहने की उम्मीद है। इससे इस क्षेत्र में लंबे समय के लिए कारोबार के अवसर बन सकते हैं।
आंकड़ों के अनुसार अच्छी तरह संचालित सीनियर लिविंग सुविधाओं में 80 से 85 फीसदी तक इकाइयां भरी हुई हैं। हालांकि, संगठित सीनियर लिविंग की पहुंच अभी केवल 1.5 फीसदी है। अमेरिका में यह 6 से 7 फीसदी और न्यूजीलैंड में 14 से 15 फीसदी है। इससे भारत में इस क्षेत्र के विस्तार की काफी संभावना दिखाई देती है।
जेएलएल की रिपोर्ट के अनुसार, 'विकास और नीतिगत परिस्थितियां अनुकूल होने पर यह बाजार 10.1 अरब डॉलर का अवसर बन सकता है। इसके लिए सभी पक्षों को मिलकर आगे बढ़ना होगा।'
प्रीमियम पता और बढ़ता दायरा
अंतरा सीनियर केयर के प्रबंध निदेशक और एएसएलआई के चेयरमैन रजित मेहता ने कहा, 'यहां विकास आर्थिक रूप से स्वतंत्र रिटायर लोगों, प्रवासी भारतीय परिवारों, ऊंची आय और बड़े अस्पतालों की नजदीकी से हो रहा है।'
मेहता ने कहा कि इकाइयों की कीमत आमतौर पर 75 लाख रुपये से शुरू होती है और स्थान, डिजाइन और स्वास्थ्य सेवाओं के आधार पर 5 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है।
यह प्रीमियम केवल घर के लिए नहीं है। सीनियर लिविंग कम्युनिटी में अब घर के साथ स्वास्थ्य सेवाएं, वेलनेस, हॉस्पिटैलिटी, सुरक्षा और सामाजिक सुविधाएं भी दी जा रही हैं।
कुशमैन ऐंड वेकफील्ड के रेजिडेंशियल सर्विसेज इंडिया के प्रबंध निदेशक शालिन रैना ने कहा कि डेवलपर बिना सीढ़ियों वाले रास्ते, आसानी से इस्तेमाल किए जा सकने वाले शौचालय, फिसलन रोकने वाली फर्श, जरूरत पर और परिसर में चिकित्सा सहायता तथा 24 घंटे एंबुलेंस जैसी सुविधाएं दे रहे हैं।
उन्होंने कहा, 'कुछ ऑपरेटर ऐसेट-लाइट मॉडल भी अपना रहे हैं। वे आवासीय इमारतों को लीज पर लेकर उनमें बुजुर्गों की जरूरत के अनुसार डिजाइन और सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं।' इस तरह सीनियर लिविंग का उत्पाद आवासीय रियल एस्टेट, हॉस्पिटैलिटी और स्वास्थ्य सेवाओं के बीच का रूप ले रहा है। हालांकि, इसका प्रीमियम सेगमेंट में बदलना यह नहीं बताता कि सीनियर लिविंग केवल महानगरों तक सीमित रहेगा। भारत में संगठित सीनियर लिविंग की करीब 60 फीसदी आपूर्ति दक्षिणी राज्यों में है। बेंगलुरु, चेन्नई और कोयंबत्तूर इसके प्रमुख बाजार हैं।
हालांकि, इसका भौगोलिक विस्तार बदल रहा है। दिल्ली-एनसीआर, खासकर गुरुग्राम और नोएडा, अब दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्रीय क्लस्टर बन रहा है। यहां संगठित स्टॉक का करीब 14 फीसदी हिस्सा है। रियल एस्टेट सलाहकार कंपनी एनारॉक के अनुमान के अनुसार, 2023 से 2025 के बीच सीनियर लिविंग की 7,000 से 7,500 इकाइयां जोड़ी गईं। गुरुग्राम और एनसीआर के अन्य हिस्से प्रमुख विकास बाजारों में शामिल हैं।
पुणे भी तेजी से उभर रहा है। मुंबई, हैदराबाद, मैसूरु और गोवा में भी गतिविधियां बढ़ रही हैं। डेवलपरों का कहना है कि यह बदलाव बुजुर्गों की अपनी पसंद के शहरों में रहने की इच्छा को दिखाता है। वे अपनी जीवनशैली और आजादी बनाए रखना चाहते हैं। साथ ही वे बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच भी चाहते हैं। हाल की कोलियर्स रिपोर्ट के अनुसार, टियर-2 और टियर-3 शहर कुल लॉन्च का 30 से 40 फीसदी हिस्सा हो सकते हैं। रहने की कम लागत, बेहतर होती स्वास्थ्य सेवाएं और धीमी जीवनशैली इसके प्रमुख कारण हैं।
तिरुपति और वृंदावन जैसे धार्मिक शहर भी उभर रहे हैं। इनके साथ कोयंबत्तूर, पुदुच्चेरी, देहरादून और वडोदरा जैसे बाजार भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। कोलियर्स के अनुमान के अनुसार, 2025 से अब तक 13,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की घोषणाएं हो चुकी हैं। संगठित सीनियर लिविंग इकाइयों की संख्या 2030 तक करीब 25,000 से बढ़कर 1 लाख होने का अनुमान है।
केवल इमारत नहीं, देखभाल भी जरूरी
इस क्षेत्र में पहले से काम कर रहे ऑपरेटरों का कहना है कि सीनियर लिविंग में आने वाले डेवलपरों के सामने सामान्य आवास से अलग चुनौतियां हैं।
अमाया सीनियर लिविंग के संस्थापक तनय साबू ने कहा, 'अपार्टमेंट बेचना कारोबार का केवल एक हिस्सा है। सीनियर लिविंग में रियल एस्टेट के साथ संचालन, हॉस्पिटैलिटी, कम्युनिटी और देखभाल शामिल होती है।'
उन्होंने कहा कि लंबे समय तक इस क्षेत्र को बढ़ाने के लिए विशेषज्ञ ऑपरेटर जरूरी होंगे। स्वास्थ्य सेवाओं को अब केवल आपातकालीन सेवा के रूप में नहीं देखा जा रहा है। उन्हें सीनियर लिविंग की मुख्य सुविधा के रूप में शामिल किया जा रहा है।
मेहता ने कहा, 'इस क्षेत्र में आने वाले डेवलपरों को या तो खुद मजबूत सेवा ढांचा तैयार करना होगा या अनुभवी ऑपरेटरों के साथ साझेदारी करनी होगी।' उन्होंने कहा कि मजबूत सेवा व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं का बेहतर जुड़ाव और कम्युनिटी विकसित करने की विशेषज्ञता के बिना इस क्षेत्र में लंबे समय का भरोसा बनाना मुश्किल है।
प्रमुख सीनियर लिविंग कम्युनिटी में कई तरह की सुविधाएं दी जा सकती हैं। इनमें स्वास्थ्य को बेहतर रखने की गतिविधियां, नियमित स्वास्थ्य जांच, नर्सिंग सहायता, फिजियोथेरेपी, आपातकालीन सहायता, अस्पतालों के साथ समन्वय और विशेषज्ञ डॉक्टरों तक पहुंच शामिल हैं।
उद्योग से जुड़े एक अधिकारी ने कहा, 'उद्देश्य यह है कि निवासी अपनी आजादी बनाए रख सकें। साथ ही जरूरत बढ़ने पर उन्हें ज्यादा देखभाल मिल सके। संपन्न शहरी बुजुर्गों के लिए इस व्यवस्था में स्थान सबसे महत्त्वपूर्ण है।'
ओहरी ने कहा कि जिन शहरों में बुजुर्ग लंबे समय से रह रहे हैं वहां उनके परिवार, दोस्त, समुदाय और पेशेवर संबंध होते हैं। इसलिए उनके पास दूर स्थित रिटायरमेंट डेस्टिनेशन पर जाने की बहुत कम वजह होती है।
सीनियर लिविंग को मिला लक्जरी रूप
- 75 लाख से 5 करोड़ रुपये: प्रीमियम सीनियर होम की कीमत
- 10.1 अरब डॉलर: भारत के सीनियर लिविंग बाजार की संभावित क्षमता
- 25,050 इकाइयां: संगठित आपूर्ति, जबकि संभावित बाजार में 17 लाख वरिष्ठ परिवार
- डीएलएफ का आगाज़: बड़े डेवलपरों में शामिल जो इस क्षेत्र में उतरने की तैयारी में हैं
- 13,000 करोड़ रुपये: 2025 से अब तक घोषित निवेश
- 1 लाख इकाइयां: 2030 तक संगठित आपूर्ति का अनुमान
- 30 से 40 फीसदी: टियर-2 और टियर-3 बाजारों से आने वाले संभावित लॉन्च का हिस्सा
- 14.9 फीसदी: 2036 तक भारत की 60 साल से अधिक उम्र की आबादी का अनुमानित हिस्सा
Media Coverage
Published In: Business Standard (Hindi)
Author: संकेत कौल (Sanket Kaul)
Publication Date: 2 October 2026
Original Article Title:
बड़े शहरों में तेजी से बढ़ रहा सीनियर लिविंग का मार्केट, DLF समेत बड़े डेवलपरों की दिलचस्पी बढ़ी
Coverage Type: News Article
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